आज दिनांक 17.10.2025 को जिला कारागार सिद्धार्थनगर में आत्मबोधन सदन (बैरक) में पवित्र शिवलिंग की भव्य स्थापना और प्राण-प्रतिष्ठा का आयोजन अत्यंत श्रद्धा, गरिमा और दिव्यता के साथ सम्पन्न हुआ। यह महत्वपूर्ण अनुष्ठान अधीक्षक सचिन वर्मा के कर-कमलों द्वारा सम्पन्न किया गया, जिन्होंने पूरे कारागार परिवार एवं बंदी समुदाय के कल्याण हेतु भगवान शिव से प्रार्थना की।
आत्मबोधन सदन वह बैरक है जहाँ प्रारंभिक रूप से बंदी ठहरते हैं और यहीं से उनके सुधारात्मक, आध्यात्मिक और अनुशासनात्मक जीवन की नई यात्रा प्रारंभ होती है। इसी विशेष महत्व के कारण शिवलिंग की स्थापना के लिए आत्मबोधन सदन का चयन किया गया, ताकि यह स्थान बंदियों के लिए न केवल आश्रय स्थल, बल्कि आत्मचिंतन, शांति, सकारात्मकता और नए जीवन की प्रेरणा का केंद्र बन सके। इस स्थापना से आत्मबोधन सदन का वास्तविक उद्देश्य—’आत्मिक जागृति और जीवन परिवर्तन’—और अधिक मजबूत हुआ। आज प्रातः काल से ही कारागार में अलौकिक वातावरण देखने को मिला। पूरे आत्मबोधन सदन को परंपरागत ढंग से सजाया गया था। शंखनाद, ओम नमः शिवाय के जाप, वैदिक ऋचाएँ और भजन-कीर्तन की ध्वनि से पूरा परिसर किसी मंदिर स्थल की तरह दिव्यता से ओत-प्रोत था। विधि-विधानपूर्वक प्राण-प्रतिष्ठा सम्पन्न की गई। गणेश वंदना, रुद्राभिषेक, पंचामृत स्नान, दुग्ध-अभिषेक, पुष्पार्चन और वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ शिवलिंग पर जलाभिषेक किया गया। अनुष्ठान के प्रत्येक चरण में धार्मिक मर्यादा और पवित्रता का विशेष ध्यान रखा गया। अधीक्षक सचिन वर्मा, जेलर मुकेश प्रकाश तथा डिप्टी जेलर अजीत चंद ने स्वयं अभिषेक कर भगवान शिव से समस्त बंदियों के मानसिक कल्याण, आत्मबल, अनुशासन और जीवन परिवर्तन की कामना की। उन्होंने यह भी कहा कि शिवलिंग की यह स्थापना सिर्फ एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि बंदियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव का आधार बनेगी। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि कारागार केवल दंड का नहीं बल्कि सुधार, आत्मबोध और नई शुरुआत का स्थान है। ऐसे आयोजन बंदियों के हृदय में आशा, संवेदना और जीवन की नई दिशा का संचार करते हैं। बंदीगण ने इस पूरे आयोजन में अत्यंत अनुशासित और स्वैच्छिक रूप से सहभागिता निभाई। उन्होंने सफाई व्यवस्था, सजावट, मंच निर्माण, जल संसाधन, भजन-कीर्तन और आयोजन की व्यवस्थाओं में सक्रिय योगदान दिया। भजन-कीर्तन के दौरान बंदियों की आवाज में भक्ति और भावनाओं की गूंज पूरे परिसर को और अधिक पवित्र बनाती रही। कई बंदियों ने बताया कि ऐसे धार्मिक और आध्यात्मिक कार्यक्रम उन्हें मन की शांति, तनाव-मुक्ति और भविष्य के प्रति नई उम्मीद प्रदान करते हैं। आत्मबोधन सदन में आज की यह आध्यात्मिक लहर उनके भीतर नई ऊर्जा भरती दिखाई दी। प्राण-प्रतिष्ठा के उपरांत सामूहिक आरती आयोजित हुई, जिसमें “हर हर महादेव” और “जय शिव शंकर” की ध्वनि से पूरा परिसर गूंज उठा। उपस्थित सभी लोगों ने आरती के बाद प्रसाद ग्रहण किया और सामूहिक सद्भाव, भाईचारा और आत्मीयता का अद्भुत दृश्य कारागार परिसर में देखने को मिला। कारागार अधिकारी-कर्मचारी और बंदीगण एक साथ इस आध्यात्मिक समारोह में सम्मिलित होकर यह संदेश दे रहे थे कि जहाँ आस्था और आत्मबोध का प्रकाश होता है, वहाँ परिवर्तन स्वतः ही उत्पन्न होता है। शिवलिंग की यह स्थापना मनोवैज्ञानिक और सामाजिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस कार्यक्रम से बंदियों के भीतर सकारात्मक विचारों का संचार होगा, उनके तनाव, भ्रम और भय में कमी आएगी तथा उनके मन में आत्मविश्वास और शांतिपूर्ण व्यवहार विकसित होगा। सुधार एवं पुनर्वास की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है, जो बंदियों को समाज में दोबारा सम्मानजनक जीवन जीने की प्रेरणा प्रदान करेगा। आत्मबोधन सदन अब वास्तविक अर्थों में आत्मिक विकास और नई शुरुआत का केंद्र बनने जा रहा है। कार्यक्रम को सफल बनाने में कारागार प्रशासन, सुरक्षा कर्मियों और कर्मचारियों का सहयोग अत्यंत सराहनीय रहा। सबने एक टीम के रूप में कार्य कर इस आध्यात्मिक आयोजन को ऐतिहासिक स्वरूप प्रदान किया। अंत में यह पावन अवसर उस संकल्प की पुष्टि करता है कि जिला कारागार सिद्धार्थनगर केवल सुरक्षा और अनुशासन का स्थान नहीं, बल्कि आस्था, आत्मबोध, सुधार और मानवता का केंद्र है। आज आत्मबोधन सदन से शुरू हुई यह आध्यात्मिक यात्रा बंदियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव की दिशा में एक प्रेरक कदम सिद्ध होगी। इस कार्यक्रम में डिप्टी जेलर महेश सिंह, प्रभारी अभिषेक कुमार पाण्डेय सहित अन्य कर्मचारीगण व बंदीगण उपस्थित रहे।
सिद्धार्थनगर
जिला कारागार सिद्धार्थनगर में आत्मबोधन सदन (बैरक) में पवित्र शिवलिंग की भव्य स्थापना और प्राण-प्रतिष्ठा का आयोजन अत्यंत श्रद्धा, गरिमा और दिव्यता के साथ सम्पन्न हुआ
- by Netra 24 Times
- 17/11/2025
- 18 Views
- 3 months ago
