कतिपय वर्दीधारियों और तस्करों की गलबहियां गठजोड़ से भारतीय कम्बल और जैकेट पहुच रहा नेपाल।
भारत-नेपाल बार्डर बढ़नी पर तस्करी रुकने का नाम नही ले रही है। वहीं जिम्मेदारों के सुस्त रवैये और कतिपय वर्दीधारियों और तस्करों की गलबहियां गठजोड़ से तस्कर नगर के गलियों से होकर भारतीय कम्बल और जैकेट नेपाल पहुंचाकर रोज लाखों कमाकर मालामाल हो रहे हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक नगर पंचायत बढ़नी क्षेत्र के चौकी से चन्द कदमों की दूरी पर स्थित आटा चक्की मिल के बगल गली से चमनगंज, आजाद नगर, कल्लन डिहवा, घरुआर, मड़नी, मलगहिया, सेमरहवा, आदि के रास्ते तस्कर दिल्ली, लुधियाना, पानीपत आदि जगहों से भारतीय कम्बल और जैकेट ट्रान्सपोर्ट के जरिये मंगाकर उसे उक्त मार्गो से नेपाल के सीमावर्ती कस्बा कृष्णानगर में पहुंचाकर जहां तस्कर रोज लाखों कमाकर मालामाल हो रहे हैं, तो वहीं कतिपय वर्दीधारी खुशहाल हो रहे हैं। आपको बताते चलें हैं कि कतिपय वर्दीधारियों के गुणा-भाग और मैनेजमेन्ट की बदौलत तस्करी का ये गोरखधन्धा अपने चरम पर है, जिसमें सभी खुशहाल और तस्कर मालामाल बताते जा रहे हैं। वहीं बताते हैं कि दिन में सिर्फ एक गली से तस्करी के धन्धे में लिप्त कैरियर सैकड़ों गट्ठर पलक झपकते ही सीमापार कृष्णानगर पहुंचा देते हैं और रात में तस्करों की चांदी ही चांदी बतायी जाती है। बुद्धिजीवियों का कहना है दिन के सापेक्ष शाम और रात में तस्करी का धन्धा और जोर पकड़ लेता है, जिसका अन्दाजा नहीं लगाया जा सकता है। कहा जाता है कि हर जगह लाइन व्यवस्था सुदृढ़ होने पर सीमा पर तैनात सुरक्षा एजेंसियों से नजरें बचाकर तस्कर अपने मंसूबों को अंजाम देते है।
