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होम्योपैथी को वैज्ञानिक साक्ष्य और क्लिनिकल एविडेन्स से मिलेगी वैश्विक पहचान – डॉ0 भास्कर शर्मा

होम्योपैथी केवल लक्षणों का उपचार नहीं, बल्कि रोगों को जड़ से मिटाने की क्षमता रखती है। लेकिन इसे वैश्विक स्तर पर लोकप्रिय और सर्वमान्य बनाने के लिए हमें ‘क्लिनिकल एविडेन्स’ (नैदानिक साक्ष्य) और वैज्ञानिक शोध पर ध्यान केन्द्रित करना होगा।” उक्त विचार शर्मा होम्योपैथिक चिकित्सालय एण्ड रिसर्च सेन्टर इटवा के चीफ कन्सलटेन्ट डॉ0 भास्कर शर्मा ने व्यक्त किया। डॉ0 भास्कर शर्मा ने जोर देते हुए कहा कि किसी भी उपचार की सफलता की पुष्टि केवल मरीज के कह देने मात्र से नहीं की जा सकती।
 वैज्ञानिक दृष्टिकोण से साक्ष्य जुटाने के लिए –
 1. इलाज से पहले की पैथोलॉजिकल और रेडियोलॉजिकल रिपोर्ट्स।
2.  उपचार के दौरान मरीज की केस हिस्ट्री और लक्षणों का विस्तृत विवरण।
3.  रोगमुक्त होने के बाद की अंतिम जांच रिपोर्ट।
4 . इन सभी का रिकॉर्ड रखना अनिवार्य है। डॉ0 शर्मा के मुताबिक यही विवरण वह ठोस सबूत हैं, जो होम्योपैथी के ‘दम’ को वैज्ञानिक कसौटी पर खरा साबित करते हैं।
      24 कैरेट सोने’ जैसी शुद्धता के लिए पीयर-रिव्यू जरूरी – डॉ0 शर्मा ने चिकित्सकों का आह्वान किया कि वे अपने सफल विवरण का दस्तावेजीकरण करें और उन्हें प्रतिष्ठित राष्ट्रीय व अन्तर्राष्ट्रीय जरनल में प्रकाशित         कराएं। उन्होंने कहा कि जब आपका शोध पत्र किसी जरनल में जाता है, तो विशेषज्ञ उसे कई पैमानों पर परखते हैं। इस प्रक्रिया के बाद आपकी उपलब्धि 24 कैरेट सोने जैसी खरी बन जाती है, जिसे पूरी दुनिया               मान्यता देती है।
5.  व्यक्तिगत उदाहरण से समझाया साक्ष्य का महत्व – उन्होंने किडनी स्टोन (पथरी) के एक मरीज का उदाहरण साझा करते हए बताया कि मरीज के दर्द ठीक होने और पथरी निकलने के दावे के बावजूद, उन्होंने स्वयं के खर्च पर मरीज का दोबारा अल्ट्रासाउण्ड कराया। रिपोर्ट में पथरी न होने की पुष्टि होना ही वह वैज्ञानिक प्रमाण था, जिसे चुनौती नहीं दी जा सकती।
6. डॉ0 भास्कर शर्मा की उपलब्धियां उल्लेखनीय –
डॉ0 भास्कर शर्मा का शोध कार्य उनके छात्र जीवन से ही प्रारम्भ हो गया था। उनके अब तक 100 से अधिक शोध पत्र (रिसर्च पेपर्स) पबमेड (पबम्ड), स्कोपस (स्कोपस) और पीयर-रिव्यूड जैसे अन्तर्राष्ट्रीय व राष्ट्रीय जरनल में प्रकाशित हो चुके हैं। उनके इस प्रयोगात्मक शोध कार्यों का लोहा आज देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी माना जाता है।