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सिद्धार्थनगर

बढ़नी क्षेत्र में झोलाछाप डॉक्टरों की भरमार, मंहगी जांच और दवा के नाम लुट रहे मरीज

नूर हेल्थ सेन्टर पर इलाज और जांच के नाम पर हजारों खर्च, फिर भी नहीं मिला आराम, मरीज पहुंची पीएचसी।

बढ़नी क्षेत्र में कहीं लैब में पैथोलॉजिस्ट डॉक्टर नहीं, तो कहीं दवा दुकान में अवैध रूप से संचालित हो रही है लैब।

क्षेत्र में इन दिनों सेटिंग-गेटिंग के जरिए पैथोलॉजी जांच और दवा के नाम पर मरीजों से खुलेआम लूट हो रही है। सूत्रों की मानें तो पैथोलॉजी सेंटर में जहां मनमाना फीस वसूला जा रहा है। वहीं दूसरी ओर इनके लैब में रेट लिस्ट भी गायब हैं। इतना ही नहीं अधिकांश ऐसे सेन्टर हैं, जहां पैथोलॉजिस्ट डॉक्टर भी नहीं हैं। इन जगहों पर बिना डॉक्टर के ही अनट्रेंड कर्मचारियों से काम चलाया जा रहा है। इसके चलते अक्सर जांच रिपोर्ट गलत निकल रही है। इन सबका सबसे बड़ा कारण स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही है। अवैध रूप से चल रहे इन अस्पतालों पर रोक नहीं लग पा रही है। यूरिक एसिड, हीमोग्लोबिन, फोलिक एसिड, विटामिन डी, लिपिड प्रोफाइल, थायराइड प्रोफाइल, लिवर प्रोफाइल, खून, पेशाब आदि की जांच बढ़नी क्षेत्र मे संचालित हो रहे करीब दर्जन भर से अधिक प्राइवेट अस्पतालों के अन्दर पैथोलॉजी लैब भी संचालित हो रहे हैं। जिसमें कई ऐसे पैथोलॉजी लैब हैं, जिनके पास न तो कोई रजिस्ट्रेशन हैं और नहीं यहां पैथोलॉजिस्ट डॉक्टर हैं। नतीजन यहां मरीजों से एक जांच दो से तीन बार करायी जाती है और मरीजों से मोटी रकम वसूलने का काम चल रहा है। यहां पैथोलॉजी जांच कर रहे कर्मचारियों के पास कोई डिग्री तक नहीं हैं। ऐसे में जांच पर सवालिया निशान खड़ा हो गया है। आपको बता दें कि अभी एक ऐसा ही ताजा मामला सामने आया है, जहां पर विकास खण्ड बढ़नी क्षेत्र के ग्राम सभा धनौरी निवासी राम रुप ने बताया कि बीते इसी 14 नवम्बर को उन्होंने अपनी 19 वर्षीय पुत्री नेहा का इलाज कराने नगर पंचायत बढ़नी पचपेड़वा मार्ग पर स्थित नूर हेल्थ सेन्टर पर गये थे। जहां पर आमिर नाम के एक डॉक्टर ने दवा खून, पेशाब जांच के नाम पर हजारों रुपए खर्च करवा दिया। वहीं कुछ दूरी पर स्थित सीटी स्कैन के लिए न्यू बलरामपुर डायग्नोस्टिक सेन्टर पर भेज दिया गया, जहां पर जांच के लिए कई हजार रुपये खर्च हो गया। फिर भी कुछ दिनों तक दवा खाने के बाद आराम नहीं मिलने पर वह शनिवार को इमरजेंसी में शाम के समय प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र बढ़नी सरकारी अस्पताल पर पहुंचकर डा0 प्रदीप कुमार को दिखाया तो उन्होंने रिपोर्ट को देखते हुए कहा कि जब उल्टी दस्त और पेट दर्द की समस्या थी तो अल्ट्रासाउण्ड कराना चाहिए था, सीटी स्कैन कराने की क्या जरूरत थी। अब अल्ट्रासाउण्ड कराने पर ही पेट से सम्बन्धित बीमारी का पता चल पायेगा। वहीं मरीज नेहा व उसके पिता ने कहा कि हम लोगों को इलाज के बारें में इस तरह की कोई जानकारी नही थी, इसलिए डाक्टर के कथनानुसार जांच, दवा करवाने से हम लोगों का पैसा बर्बाद हो गया है और कोई फायदा भी नही हुआ। ऐसे डाक्टर से लोगों को बचकर रहना चाहिए। अब आगे का इलाज कैसे होगा, इस चीज की चिन्ता गरीब परिवार को सता रही है। वहीं कुछ लोगों ने दबी जुबान से कहा कि ऐसे डाक्टरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।