आर्थिक संकट के बीच जबरिया वसूली बना चर्चा का विषय, ऋण धारक को मिली दो दिन की मोहलत
विकास खण्ड शोहरतगढ़ के बगुलहवा में किस्त रिकवरी एजेन्ट और ऋण धारक के बीच बहस का वीडियो वायरल हो रहा है। आपको बता दें कि गैर-बैंकिंग वित्तीय कम्पनी (एनबीएफसी) के एजेन्टों का लोन धारकों से किस्त (EMI) की जबरिया वसूली के दौरान बहस होना आम बात है। बात तब बढ़ जाती है जब लोन धारक मुसीबत एवं आर्थिक संकट का हवाला देता है और वह लोन की किस्त देने में सक्षम नहीं होता अथवा कुछ और भी कारण हो सकते है। इन्हीं परिस्थितियों में लोन की ईएमआई रिकवरी एजेन्ट जब दबाव बनाने लगते हैं, कि हमको किस्त चाहिए तो चाहिए। ऐसी दशा में एजेन्ट और लोन धारक के बीच बहस होना कोई नई बात नहीं है। जिसका विविध वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर भी देखा जा सकता है। ताज़ा मामला शोहरतगढ़ ब्लॉक के ग्राम पंचायत बगुलहवा का है। वसूली के लिए गांव में आये रिकवरी एजेन्टों के कतिथ हरकत के कारण चर्चा इस बात की उठी की रिकवरी एजेन्ट द्वारा लोन धारक महिला द्वारा ईएमआई (किस्त) नहीं दिये जाने पर उसके घर का दरवाजा तोड़ा जा रहा है और यह बात जंगल में आग की तरह फैल गई। मामले की जानकारी के लिए जब महिला के घर जाकर सम्पर्क किया गया तो पता चला। महिला द्वारा ज़ब यह बताया गया कि वर्तमान समय में उसे आर्थिक संकट है और वह किस्त का पैसा दो दिन बाद देगी, लेकिन वसूली के लिए घर पर दबीश देने आये रिकवरी एजेन्ट से उसका बहस हो गया और बहस लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया। वहीं जानकार बताते है कि एजेन्ट के एक साथी द्वारा घर का दरवाजा खोलने के दौरान दरवाजा हाथ से छूट गया और वह दीवाल में जोर से टकराया। इसी बात को लेकर महिला के परिजन आक्रोशित हो गये। लोन धारक महिला ने यह भी बताया कि उसका लड़का रोजी-रोटी के सिलसिले में मुम्बई रहता है और उसकी तबीयत खराब है। इसलिए वह ईएमआई देने में सक्षम नहीं है और आर्थिक संकट का हवाला देने के बाद भी 2 दिन में किसी तरह किस्त देने की बात कही है। रिकवरी एजेन्ट गोरखपुर क्षेत्र के बताये जा रहे है।
