चौपाल में उजागर हुई अव्यवस्थाएं, बयानों में विरोधाभास
विकास खण्ड बर्डपुर अन्तर्गत ग्राम पंचायत बजहां में आयोजित चौपाल उस समय हंगामेदार हो गई, जब ग्रामीणों के सम्मुख पंचायत भवन से जुड़ी गम्भीर अव्यवस्थाएं खुलकर सामने आ गईं। चौपाल में पहुंचे ग्रामीणों ने पंचायत भवन की बदहाल स्थिति और ऑनलाइन कार्य व्यवस्था ठप होने को लेकर खुला विरोध दर्ज किया। ग्रामीणों का कहना था कि पंचायत भवन का निर्माण इस उद्देश्य से किया गया था कि गांव स्तर पर ही बैठकों के माध्यम से समस्याओं का समाधान हो और सभी ऑनलाइन कार्य यही सम्पन्न हो, लेकिन लाखों रुपये की लागत से बना यह भवन आज ग्रामीणों के लिए अनुपयोगी साबित हो रहा है। ऑनलाइन कार्यों के लिए ग्रामीणों को निजी दुकानों का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे उन्हें समय और धन दोनों की हानि उठानी पड़ रही है। ग्रामीण रामू ने आरोप लगाया कि पंचायत भवन से कम्प्यूटर गायब है और यह स्पष्ट नहीं है कि वह आखिर कहां है। उन्होंने कहा कि पंचायत भवन से कभी ऑनलाइन कार्य नहीं होता। साथ ही शौचालय की दुर्दशा पर सवाल उठाते हुए बताया कि पानी की आपूर्ति नहीं होने और टंकी क्षतिग्रस्त होने के कारण महिलाओं को शौच के लिए बाहर जाना पड़ता है। वहीं अहमद अली ने बताया कि पंचायत भवन अधिकांश समय बन्द रहता है और केवल औपचारिक कार्यक्रमों के दौरान ही खोला जाता है। ऑनलाइन कार्यों के नाम पर ग्रामीणों को निजी दुकानों पर भेज दिया जाता है। ग्रामीणों ने आशंका जताई कि पंचायत का कम्प्यूटर निजी उपयोग में लिया जा रहा है। चौपाल के दौरान पंचायत सहायक मोहम्मद नसीम ने दावा किया कि पंचायत भवन में कम्प्यूटर मौजूद है, लेकिन नेटवर्क की समस्या के चलते वह चौराहे से कार्य करते हैं। हालांकि मौके पर कम्प्यूटर कक्ष में केवल बन्द पड़ा यूपीएस, खराब बैटरी और दबा हुआ फर्श ही नजर आया, जिससे उनके दावे पर सवाल खड़े हो गये। पंचायत सचिव मनोहर लाल बरनवाल ने नेटवर्क समस्या स्वीकार करते हुए वाई-फाई लगवाकर पंचायत भवन से कार्य शुरू कराने की बात कही। वहीं ग्राम प्रधान प्रतिनिधि अजहर हुसैन ने कहा कि कम्प्यूटर जहां भी है, सुरक्षित है, जबकि पंचायत सहायक का कहना है कि वह मोबाइल से ऑनलाइन कार्य करते हैं और कम्प्यूटर पंचायत भवन के दूसरे कक्ष में रखा है। दोनों बयानों में स्पष्ट विरोधाभास सामने आने से ग्रामीणों की नाराजगी और गहरी हो गई।
मामले पर खण्ड विकास अधिकारी ओम प्रकाश यादव ने स्पष्ट कहा कि पंचायत भवन की स्थिति जर्जर है और कम्प्यूटर वहां सुरक्षित नहीं है, चोरी की आशंका बनी रहती है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब पंचायत भवन ही उपयोग योग्य नहीं है, तो लाखों रुपये खर्च कर इसके निर्माण का औचित्य क्या रह जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि कम्प्यूटर का निजी उपयोग कहीं न कहीं किया जा रहा है, जो सरकारी धन के दुरुपयोग की ओर इशारा करता है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस गम्भीर मामले पर क्या ठोस कार्रवाई करता है या पंचायत भवन की अव्यवस्थाएं यूं ही फाइलों में दबी रह जायेगी।
