12 जनवरी 2026 का यह पावन दिवस केवल एक तिथि नहीं है, अपितु यह भारत की युवा चेतना, आत्मविश्वास और राष्ट्रनिर्माण के संकल्प का महोत्सव है। स्वामी विवेकानंद जी के जन्मदिवस के अवसर पर मनाया जाने वाला राष्ट्रीय युवा दिवस हमें यह स्मरण कराता है कि जब युवाओं की सोच ऊँची होती है, तो राष्ट्र का भविष्य स्वतः उज्ज्वल हो जाता है। प्रधानाचार्य महोदय के दूरदर्शी दिशा-निर्देशों के क्रम में आज यह महान दिवस (स्वदेशी संकल्प दौड़) चिकित्सा महाविद्यालय में अत्यंत श्रद्धा, प्रेरणा एवं उत्साह के साथ मनाया गया। यह उत्सव न केवल एक औपचारिक कार्यक्रम था, बल्कि यह आत्ममंथन का वह क्षण था, जहाँ हम सभी ने स्वयं से प्रश्न किया—क्या हम स्वामी विवेकानंद के विचारों को अपने जीवन में उतार पा रहे हैं? स्वामी विवेकानंद जी केवल संन्यासी नहीं थे, वे मानवता के चिकित्सक थे।
उनके शब्द आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं—
“उठो, जागो और लक्ष्य प्राप्ति तक रुको मत।”
मेडिकल कॉलेज के छात्र-छात्राओं के लिए स्वामी विवेकानंद जी का व्यक्तित्व एक आदर्श प्रकाशस्तंभ है। उनका जीवन हमें बताता है कि सच्चा युवा वही है जो अपने ज्ञान का उपयोग समाज के अंतिम व्यक्ति के कल्याण के लिए करता है। रोगी की पीड़ा को समझना, पीड़ित मानव की सेवा को ही ईश्वर-सेवा मानना—यही विवेकानंद जी का संदेश है।
अंत में, राष्ट्रीय युवा दिवस के इस पावन अवसर पर हम सभी यह संकल्प लें कि—
हम केवल चिकित्सक नहीं, संवेदनशील मानव बनेंगे;
हम केवल डिग्री नहीं, कर्तव्य-बोध अर्जित करेंगे;
और स्वामी विवेकानंद जी के पदचिन्हों पर चलकर राष्ट्र, समाज और मानवता की सेवा करेंगे।
