अपने प्रश्न के माध्यम से उन्होंने वर्ष 2012 में जीआई टैग मिलने के बाद से कालानमक चावल के निर्यात का विवरण, अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसके प्रचार-प्रसार के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदम तथा अन्य स्वदेशी अनाजों को जीआई टैग देने की संभावनाओं पर सरकार से जानकारी मांगी। सरकार ने अपने उत्तर में बताया कि 1 मई 2025 से जीआई मान्यता प्राप्त चावल (जिसमें कालानमक चावल शामिल है) के लिए अलग टैरिफ कोड बनाए गए हैं, जिससे अब इसके निर्यात का अलग-अलग डेटा उपलब्ध हो रहा है। अप्रैल 2025 से नवंबर 2025 के बीच जीआई मान्यता प्राप्त गैर-बासमती चावल का कुल निर्यात लगभग 76.95 मिलियन अमेरिकी डॉलर (₹663.93 करोड़) रहा। सरकार ने यह भी जानकारी दी कि कालानमक चावल के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए एपीडा द्वारा वित्तीय सहायता योजना, अंतरराष्ट्रीय फूड फेयर में प्रदर्शन, अनुसंधान परियोजनाएं, किसान प्रशिक्षण कार्यक्रम तथा सप्लाई चेन स्टार्टअप्स को बढ़ावा दिया जा रहा है। श्री पाल ने कहा कि कालानमक चावल पूर्वांचल और तराई क्षेत्र की कृषि पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसके निर्यात को बढ़ावा देने से किसानों की आय बढ़ेगी तथा भारत की पारंपरिक कृषि विरासत को वैश्विक पहचान मिलेगी। यह मुद्दा क्षेत्रीय कृषि उत्पादों के वैश्वीकरण और “लोकल टू ग्लोबल” दृष्टिकोण को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। स्रोत: लोकसभा में दिए गए सरकारी उत्तर के आधार पर।
दिल्ली
आज Jagdambika Pal ने Lok Sabha में अनस्टार्ड प्रश्न संख्या 1691 के माध्यम से कालानमक चावल के निर्यात, वैश्विक ब्रांडिंग और किसानों को होने वाले लाभ से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे को उठाया
- by Netra 24 Times
- 10/02/2026
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- 1 week ago
