करोड़ों रुपये की लागत से वर्षों पहले बने माघ मेला स्थित बृजभूषण मैरेज हाल की मरम्मत के नाम पर लाखों रुपये खर्च कर दिए गए, लेकिन हालात आज भी खंडहर जैसे बने हुए हैं। नगर पालिका परिषद बांसी द्वारा कराई गई तथाकथित मरम्मत केवल कागजों में हुई, ज़मीनी सच्चाई कुछ और ही बयान कर रही है। जमीनी हकीकत चौंकाने वाली मैरेज हाल की स्थिति आज भी बदतर बनी हुई है —
दीवारों में बड़ी-बड़ी दरारें
टाइलें टूटी हुई
फर्श धंसा हुआ
चारों ओर गंदगी का अंबार
छत से लोहे के सरिए झांक रहे
सीमेंट झड़कर नीचे गिर रहा
लाखों की मरम्मत के बावजूद यह भवन किसी भी समय जानलेवा हादसे का कारण बन सकता है।
22 लाख का खेल
सूत्रों के अनुसार, मैरेज हाल के निर्माण और मरम्मत के नाम पर टेंडर प्रक्रिया के जरिये लगभग 22 लाख रुपये की बंदरबांट की गई, लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ।
सवाल उठता है —
पैसा गया कहां? काम हुआ कहां?
नगर पालिका में लूट का अड्डा?
नगर पालिका बांसी में वर्षों से चल रही खाऊ-कमाऊ नीति के कारण नगर का विकास पटरी से उतर गया है। बड़े-बड़े प्रोजेक्ट सिर्फ फाइलों में पूरे हुए, धरातल पर सब कुछ ढह चुका है। भाजपा सरकार पारदर्शिता और विकास की बात करती है, फिर बांसी नगर पालिका में करोड़ों के घोटाले किसके संरक्षण में चल रहे हैं?
यह प्रश्न
आखिर कौन है जो नगर के विकास के धन की लूट की खुली छूट दे रहा है?
अधिकारियों और ठेकेदारों को संरक्षण दे रहा है?
जनता की आंखों में धूल झोंक रहा है?
यह घोटाला जिला ही नहीं, बल्कि प्रदेश स्तर पर जांच की मांग करता है।
अब जनता पूछ रही है — जिम्मेदार कौन? कब होगी कार्रवाई?
सूत्रों की मानें तो नगर विकास लूट में बाबूओं का भी हाथ रहता है।
