लाल फीता शाही का शिकार होकर रह गई परियोजना
किसानों के सैकड़ों हेक्टेयर खेतों को सिंचाई के नाम खोदने वाले सरयू नहर की करामात देखने के लिए किसी के पास समय नहीं है। वर्तमान में जिलाधिकारी सिद्धार्थनगर शिवशरणप्पा जीएन के निर्देश पर टेल तक पानी पहुंचाने का जिम्मा उठाने वाले विभाग द्वारा किस माइनर रजवाहा या नहर में कितना पानी पहुंच रहा है, इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है सिंचाई विभाग के बांसी स्थिति केन्द्रीय कार्यालय से 400 मीटर दूरी पर स्थित बजरडीह माइनर है। प्रत्येक वर्ष सफाई के नाम पर कुंए में तब्दील होते जा रहे इस माइनर में कहने को पानी चलाया जा रहा है, परन्तु वो पानी किस काश्तकार को मिल रहा है, ये केवल सिंचाई का पड़ताल करने वाले कर्मचारियों के पास ही है। प्रत्येक वर्ष इस इस माइनर के अन्दर जेसीबी की गड़गड़ाहट गूंजा करता है। यही हाल यहां से कुछ दूरी पर स्थित जीवा माइनर का भी है। अक्टूबर में टेण्डर के माध्यम से नहरों के सिल्ट सफाई में मोटा झोल करने में कई वर्षों से लगे विभाग के जिम्मेदारों द्वारा इसके क्रियान्वयन पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता है। नतीजतन कोई भी माइनर रजवाहा या नहर की सफाई कितना प्रतिशत किया गया, इसकी जानकारी किसी के पास नहीं है। सूत्रों के मुताबिक सत्ताधारी पार्टी के नेताओं द्वारा इसका टेण्डर अपने नाम से लेकर बेंच दिया जाता है। अन्य सूत्रों की मानें तो 35 से 45 प्रतिशत बिल डालकर उठाए जाने वाले टेण्डरों में अधिकांश कार्य केवल कागजों में पूरा हो जाता है। खरीफ फसलों के समय देर में हुए बारिश के कारण अधिकांश शहरों में पानी भरा होता है। 15 दिसम्बर को रबी के पानी चलाये जाने का रोस्टर तय है। लगभग 52 नहरों का जाल जिले में बिछाया गया है। इससे कितने किसानों को सीधे पानी का सप्लाई मिल रहा है, इसका भी ठोस उत्तर किसी के पास नहीं है। विश्व बैंक की परियोजना यहां लाल फीता शाही का शिकार होकर दम तोड रही है। इस विषय में कई काश्तकारों ने बताया कि अपने बोरिंग व पंपिंग सेट के माध्यम से खेतों में पानी चलाते हैं।
