महामहिम राष्ट्रपति को संबोधित ५-सूत्रीय मांग पत्र जिलाधिकारी के माध्यम से सौंपते हुए कन्हैया लाल लोधी ने राष्ट्रीय, प्रादेशिक और क्षेत्रीय स्तर पर शोषितों के साथ हो रहे अन्याय का कच्चा चिट्ठा खोला। उन्होंने कहा कि आज एक तरफ UGC बिल (2026) के माध्यम से सुधारों की बात हो रही है, तो दूसरी तरफ वर्ष 2012 में उच्चतम न्यायालय द्वारा शैक्षणिक संस्थानों में भेदभाव रोकने हेतु दिए गए सख्त निर्देशों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। उन्होंने सरकार को घेरते हुए कहा कि प्रदेश में हजारों सरकारी विद्यालय बंद कर गरीबों को शिक्षा से वंचित किया जा रहा है, जो एक सुनियोजित साजिश है। प्रेस वार्ता के दौरान कन्हैया लाल लोधी ने अपनी ५-सूत्रीय मांगों को स्पष्ट करते हुए कहा कि हमारी पहली मांग UGC कानून (2026) को तत्काल प्रभावी बनाकर संस्थानों में दलित-पिछड़ों के साथ होने वाले भेदभाव को अपराध की श्रेणी में दर्ज करने की है। दूसरी मांग, शिक्षा के बाजारीकरण और भ्रष्टाचार पर कठोर प्रहार कर बंद किए जा रहे सरकारी स्कूलों को पुनः संचालित करने की है। तीसरी मुख्य मांग, उच्च शिक्षा में पिछड़ों के बच्चों के विरुद्ध जारी ‘अदृश्य तानाशाही’ और मानसिक प्रताड़ना को जड़ से खत्म करने की है। चौथी मांग के तहत, जनपद सिद्धार्थनगर के ग्राम ताल भरौना (एकमापुर) निवासी चंद्रबली लोधी की निर्मम हत्या की विस्तृत SIT जांच कराकर असली साजिशकर्ताओं को जेल भेजने की मांग की गई है। पांचवीं और अंतिम मांग के रूप में, एटा, हरदोई और मध्य प्रदेश में लोधी समाज के युवाओं की संदिग्ध हत्याओं की उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों के कठोर से कठोर की सजा देने की आवाज उठाई गई है। कन्हैया लाल लोधी ने चेतावनी दी कि पिछड़ों की उठती आवाज को कुचलने के लिए साहूकार, जमींदार और पूंजीपति वर्ग शासन-प्रशासन के साथ मिलकर जो दमन चक्र चला रहे हैं, उसका अंत अब निकट है। उन्होंने संकल्प लिया कि जब तक अंतिम व्यक्ति को न्याय नहीं मिल जाता, यह लड़ाई जारी रहेगी। इस संघर्षपूर्ण प्रदर्शन में मुख्य रूप से ओमप्रकाश लोधी, रमेश निषाद, राजाराम लोधी, सुनील कुमार, रामनिहाल लोधी, सुरेंद्र लोधी, दीपचंद्र लोधी, महेंद्र लोधी, राममिलन लोधी, मिथलेश लोधी,पृथ्वीराज सिंह लोधी, रामकिशोर यादव, शिवधनी यादव, शम्भू प्रसाद ,नासीर अली और सूरज सिंह लोधी सहित भारी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे।
